लफ्फाज़ी....
लफ्ज़ सिर्फ़ बहाना है...
Friday, September 2, 2011
बचपन
मेरे घर की छत के ऊपर
हरे किनारों वाली
एक नदी दिखती थी
नीले रंग की ...
बादलों की नावें
तैरती रहती थी जिनमें
दिन भर ...
और कभी -
थके हुए बादलों से
एक टूकड़ा टूट जाता था
बुलबुला बनकर ...
फिर रात में
बैठकर उन बुलबुलों में
मैं निकल जाता था
चाँद तारों के टापूओं पर
सैर करने
सपनों में ...
- कुंदन
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