Sunday, October 16, 2011
Tuesday, October 4, 2011
अतीत के अवशेष
शब्द तुम्हारी खामोशियों के...
आज भी सुनता हूँ तुम्हें
और तुम्हारी आहटों को
और तुम्हारी आहटों को
महसूस करता हूँ उस खुशबू को
जो कभी तुम्हारा एहसास कराती थी...
वर्षों बाद
जब आज गुजरा हूँ
देखता हूँ
पंचायत भवन की टूटी खिड़की
जिससे झांक रही थी कुछ परछाइयाँ...
मुझे देख रही थी...मानो आश्चर्य से
पीछे पलट कर देखता हूँ
शायद तुमने पुकारा हो...
ढूंढ़ रहा हूँ
इन्ही रास्तों पर
कागज़ के कुछ टुकड़े
जो गिराए गए होंगे
कभी शायद मेरे लिए...
वर्षों बीत गए हैं
पर वो कागज़ के कुछ टुकड़े
आज भी दबे हुए हैं
यहीं कहीं
इन्ही रास्तों पर
मानों मेरे अतीत के अवशेष हों
जिसके टुकड़े बिखरे पड़े हैं
इधर उधर
पेड़ से गिरे सूखे पत्तो की तरह
जहाँ हर पत्ती एक कहानी कहती है
तुम्हारी कहानी...
मेरी आँखों से...
-कुंदन
Saturday, October 1, 2011
मोनालिसा
हमेशा की तरह
आज फिर थक गया हूँ...
दुनिया कहती है
ज़िन्दगी को चित्रकथा बनाओ
लोगो को आसानी होती है ना पढने में !
और तस्वीर की मुस्कुराहट
थोड़ी लम्बी होनी चाहिए
थोड़ी रहस्यमयी भी
मोनालिसा की तरह...
मैं थक जाता हूँ
मुस्कुराहटो के बोझों से...
कई बार सुना था-
ज़िन्दगी खुली किताब नहीं होनी चाहिए
क्या करूं-
ज़िल्द चढ़ाना नहीं जानता...
मैं थक जाता हूँ...
और फिर
हमेशा की तरह
निकल पड़ता हूँ
ढूंढने सपनों में,
एक सादा सफ़ेद पन्ना
और एक किताब
बिना ज़िल्द वाली...
- कुंदन
Sunday, September 4, 2011
Memories....
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| The serene Beach |
Keri beach... Goa... a serene and secluded... and the most beautiful beach of Goa where you can see a river, a hill and a dutch Fort at the same place....
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| The River |
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| Happy Moments... |
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| Secluded |
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| At the top of the fort |
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| Rahul... Now a story |
Me, Vivek and Rahul...
if there is bliss...it was this...
Sunset at Keri...
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Friday, September 2, 2011
Tuesday, July 5, 2011
Tuesday, March 15, 2011
एक पंख वाली गोरैया...
Under the house eaves the baby
sparrow chirpingAs they beg for food in their untidy
nest of hay
Near human dwellings they are
quite familiar
They never cease to chirp all
through the day...
- Francis Duggan
सफ़ेद पंख, सर पे भूरी-भूरी धारियां ,छोटी सी आँखें, चोंच इतनी छोटी की बस एक बार में एक ही दाना खा सके...गोरैया ही तो कहते हैं... Sparrow ...पर वो तो गोरैया ही बोलता आया है ...
छोटा था तब ...जब गाँव में उसके घर की छत से लगे तख्तें उसके घोंसलों से भरे रहते ...House Within A House... दिन भर चीं-चीं करते घोंसलों में बच्चे...उसे सब कुछ याद है...
एक दिन जब एक घोंसला फर्श पर गिर गया था ...उसने देखा था... घोंसले में गोरैया के छोटे-छोटे बच्चे...लाल लाल से...उसे उस रात सपना भी तो आया था ...एक पंख वाली गोरैया का...और जब सुबह उसने घर में बताया था तो सब हंस परे थे.
उसे सब कुछ याद है...अँधेरा होते हीं जब देवता-घर में साँझ दिखने की बेला हो जाती तो वें घर के आँगन के चारो ओर गोल-गोल चक्कर लगाने लगती. और कभी-कभी जब उसके सर के ठीक ऊपर से वो उड़ जाती तो उसे चिढ होती ...वो मारने दौड़ता ...तो उसकी दादी मना कर देती ...ऐ मत मार...आज भी याद है ...
दादी कहती थी ...जिस घर में गोरैया का वास होता है उस घर में प्यार बसता है ...खुशियां होती है.
सच ही तो कहती थी दादी... कितना अच्छा लगता था बचपन में...अक्सर जब उसे बुखार हो जाया करता था तो घर की देहरी पर पड़ी खाट पे पड़ा-पड़ा बड़े ध्यान से देखा करता...बघवा-चिड़ियाँ और गोरैया अलग-अलग होती है...उसकी दादी उसके तलवों को कपड़े से सहलाती रहती और वे झुण्ड बना कर उड़ती रहती...देहरी के ऊपर चारो तरफ ...बहुत अच्छा लगता था उसे...
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एक पंख वाली गोरैया...
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वर्षों बाद वो गाँव आया है ...
अब तो ना दादी रही ...
ना ही देहरी पे गोरैया...
ना ही उसका बचपन...
सच कहती थी दादी ..."जिस घर में गोरैया रहती है ...उस घर में ..........................".
-कुंदन
(20th March is the World Sparrow Day)...
Saturday, February 5, 2011
Shri Krishna ...
चिपचिपे दूध से नहलाते हैं, आंगन में खड़ा कर के तुम्हें शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, ना जाने क्या क्या
घोल के सर पे लुढ़काते हैं गिलासियाँ भर के
औरतें गाती हैं जब तीव्र सुरों में मिल कर
पाँव पर पाँव लगाए खड़े रहते हो
इक पथराई सी मुस्कान लिए
बुत नहीं हो तो परेशानी तो होती होगी
जब धुआँ देता, लगातार पुजारी
घी जलाता है कई तरह के छौंके देकर
इक जरा छींक ही दो तुम
तो यकीं आए कि सब देख रहे हो...
--गुलज़ार
Monday, January 31, 2011
Thursday, January 20, 2011
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