हमेशा की तरह
आज फिर थक गया हूँ...
दुनिया कहती है
ज़िन्दगी को चित्रकथा बनाओ
लोगो को आसानी होती है ना पढने में !
और तस्वीर की मुस्कुराहट
थोड़ी लम्बी होनी चाहिए
थोड़ी रहस्यमयी भी
मोनालिसा की तरह...
मैं थक जाता हूँ
मुस्कुराहटो के बोझों से...
कई बार सुना था-
ज़िन्दगी खुली किताब नहीं होनी चाहिए
क्या करूं-
ज़िल्द चढ़ाना नहीं जानता...
मैं थक जाता हूँ...
और फिर
हमेशा की तरह
निकल पड़ता हूँ
ढूंढने सपनों में,
एक सादा सफ़ेद पन्ना
और एक किताब
बिना ज़िल्द वाली...
- कुंदन

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