चुप्पी ...
काश ! किसी दिन
ऐसा होता...
तुम चुप होती
मैं चुप होता...
हर तरफ़
चुप्पी का पहरा होता...
बातें होती
टुकड़ों में,
पलकों के किनारों से
ख़ामोशी से...
चुपचाप...
तुम्हारी आँखें कुछ कहती
कहती रहती...
मेरी खामोशियाँ उन्हें सुनती
बस सुनती रहती...
ख़ामोशी से...
चुपचाप...
-कुंदन
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