Thursday, January 20, 2011

चुप्पी ...


काश ! किसी दिन
ऐसा होता...
तुम चुप होती
मैं चुप होता...
हर तरफ़
चुप्पी का पहरा होता...

बातें होती
टुकड़ों  में,
पलकों के किनारों से
ख़ामोशी से...
चुपचाप...

तुम्हारी आँखें कुछ कहती
कहती रहती...
मेरी खामोशियाँ उन्हें सुनती
बस सुनती रहती...

ख़ामोशी से...
चुपचाप...

-कुंदन

1 comment:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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