अलसायी सी रात
और अलसाया मैं...
छत पर छिटकी
चुटकी भर चाँदनी...
दूर कहीं बजती
विविध भारती
रात-रानी की खुशबू
और छायागीत-
"पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा
हाल हमारा जाने है..."
सिरहाने बैठे थपकियाँ करते
जागे हुए से ख्वाब सारे...
चाँद भी थककर
जो लेने लगा ऊबासियाँ
सो जाऊं मैं की
अब नींद को भी नींद आती है ...
- कुन्दन
और अलसाया मैं...
छत पर छिटकी
चुटकी भर चाँदनी...
दूर कहीं बजती
विविध भारती
रात-रानी की खुशबू
और छायागीत-
"पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा
हाल हमारा जाने है..."
सिरहाने बैठे थपकियाँ करते
जागे हुए से ख्वाब सारे...
चाँद भी थककर
जो लेने लगा ऊबासियाँ
सो जाऊं मैं की
अब नींद को भी नींद आती है ...
- कुन्दन
bahut sahi dost...
ReplyDeleteदूर कहीं बजती
ReplyDeleteविविध भारती
रात-रानी की खुशबू
और छायागीत-
बहुत खूब
अत्यंत सरल और भावपूर्ण।