लफ्फाज़ी....
लफ्ज़ सिर्फ़ बहाना है...
Sunday, December 26, 2010
जिंदगी ...
जिंदगी
एक डायरी की तरह होती है ...
वक़्त आकर
हर रोज़
एक पन्ना पलट जाती है ...
कभी सादे-
तो कभी
स्याही छोड़कर ...
1 comment:
Anonymous
March 18, 2011 at 12:05 AM
ये पंक्तियाँ मुझे आज़ भी उतनी हीं मुग्ध करती हैं - चिर यौवनी .
Reply
Delete
Replies
Reply
Add comment
Load more...
Newer Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ये पंक्तियाँ मुझे आज़ भी उतनी हीं मुग्ध करती हैं - चिर यौवनी .
ReplyDelete