Sunday, December 26, 2010

जिंदगी ...



जिंदगी
एक डायरी की तरह होती है ...

वक़्त आकर
हर रोज़ 
एक पन्ना पलट जाती है ...

कभी सादे-
तो कभी 
स्याही छोड़कर ...

1 comment:

  1. ये पंक्तियाँ मुझे आज़ भी उतनी हीं मुग्ध करती हैं - चिर यौवनी .

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